ज़िंदगी, तु बेवफ़ा निकली..!😱

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तुझ सा हमसाया था, दुनिया का सरमाया था।
मेरी तिश्नगी बन कर, मुझको ही भरमाया था॥
भ्रम टूटा तो जाना, तेरी मेहर हीं जफ़ा निकली.!
ज़िन्दगी, तु भी बेवफ़ा निकली.!!

सोचा था तेरे साये में, दिन के ऊजियारे में।
राहत मिलेगी मुझको, रात के अँधियारे में॥
पर तु भी मेरे ‘यार’ सी, ख़फ़ा-ख़फ़ा निकली.!
ज़िन्दगी, तु भी बेवफ़ा निकली.!!

✍🏻@raj_sri



*सरमाया – धन-दौलत;
*तिश्नगी – चाह, लालसा;
*जफ़ा – ज़ुल्म, अत्याचार;


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रूह बेचैन है..!😢

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साथ-साथ बचपन के खेल खेले।
संग-संग देखे थे जवानी के मेले॥
उससे बिछड़ के दिल में कहाँ चैन है।
हाँ… सच में आज मेरी रूह बेचैन है॥

साथसाथ देखे थे सपने सुहाने।
जीवन के गाये थे कितने तराने॥
उस शयको हर घड़ी ढूँढे ये नैन है।
हाँसच में आज मेरी रूह बेचैन है॥

हर सुखदुःख में जो संग रहा।
या भरा हुआ या हाथ तंग रहा॥
खो कर उसे तो फीका ये दिनरैन है।
हाँसच में आज मेरी रूह बेचैन है॥


✍🏻@raj_sri

जब तक साँसे चलती हैं..!


जब तक साँसें चलती हैं, उम्मीदों का दामन छूटे ना।
आँखें जब तक हैं खुली, सपनों से अनुबंधन टूटे ना॥

जीवन का हर रण जीत कर, शौर्य अर्जन अहम नहीं;
हार कर भी दिल जितने का, आशीष अर्जन छूटे ना।
आँखें जब तक हैं खुली, सपनों से अनुबंधन टूटे ना॥

हो ऐसा ‘रासि’ चाल-चलन, ग़ैर भी सम्बंधों को तरसे;
अपना हो सलीका ऐसा, अपनों से अपनापन रूठे ना।
आँखें जब तक हैं खुली, सपनों से अनुबंधन टूटे ना॥


@raj_sri

पंछी…🦅

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Img Courtesy : YQ

नहीं किसी मुँडेर पर दाना;
पंछी फिर  चुनने आयेंगे।
वो दिन भी दूर नहीं जो ये;
सपनों से भी उड़ जायेंगे॥

इनकी मधुरिम मधुर वाणी;
रखा जायेगा संग्रहालय में।
पेड़ों की डाली के बदले ये;
यंत्रो में से गा हमें जगायेंगे॥

#मीठी तो होगी वो बोली;
उसमें ना पर मिठास होगा।
तब कहीं जा कर अपनी;
ग़लती का आभास होगा॥

पत्थर की दुनिया मेंरासि‘;
पत्थरना बन जाओ तुम।
इंसा हो तोइंसाबन कर;
प्राकृतिक भेंट बचाओ तुम॥


✍🏻@raj_sri

 

 

सारा दोष हमारा था.!

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लूटते रहे वर्षों जिसे तुम;
वोप्रेमकोषहमारा था।
सहता रहा ज़्यादतियाँ तुम्हारी;
हाँ… सारा दोष हमारा था॥

कभी ना मुझको अपना समझा;
ना समझने की चाह करी।
हरदम तेरा ही ग़म सुना दिल;
कभी ना ख़ुद की आह सुनी॥

रहते थे वर्षों महफ़ूज़ जहाँ;
रासिआग़ोश हमारा था।
सहता रहा ज़्यादतियाँ तुम्हारी;
हाँ… सारा दोष हमारा था॥


✍🏻@raj_sri

चुनावी चुहल.!😜

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सुनो सोना, लव-कुश के पप्पा;
काहे, पंजा का लिया ठप्पा..
कमल जो था खिलना ही पक्का;
काहे, पंजा का लिया ठप्पा..

किसी भी क़ीमत पे, अब हारेगी भजपा;
तु बोले की पूनम, सपा-बसपा में बसजा..
पर जनता ने छुड़ा दिया छक्का..
काहे, पंजा का लिया ठप्पा..

ऊपर मुँह कर के, काहे आसमां पे थूके;
सांसद का ये मुमकिन मौक़ा भी चूके..
बड़ बोलेपन में ही खाया ग़च्चा..
काहे, पंजा का लिया ठप्पा..


✍🏻@raj_sri

दुनिया…!!! मेरी राह जुदा है॥

                          Img Courtesy: YQ
मैं ख़्वाबों की आसमानों में उड़ता हूँ;
पर भुला नहीं मंज़िल मेरी वसुधा है।
दुनिया…!!! मेरी राह जुदा है॥ना सुनाओ क़िस्मतों की कहानियाँ;
मेरे लिये तो मेहनत असली मुद्दा है।
दुनिया…!!! मेरी राह जुदा है॥वक़्त के थपेड़े से, हाँ है थोड़ा थर्राया;
पर ना ही मंज़िल, राही गुमशुदा है।
दुनिया…!!! मेरी राह जुदा है॥तुम ढूँढो, मंदिर में, मस्जिद में रासि;
मेरे लिये तो माँबाप ही मेरी खुदा है।
दुनिया…!!! मेरी राह जुदा है॥

✍🏻@raj_sri

महाराणा प्रताप..! 🤺🏹⚔️

हाड़-माँस का पुतला नहीं, मिट्टी में जन्मा फ़ौलाद था।

कुंभलगढ़ का राज कुँवर वो, हल्दीघाटी का औलाद था॥

मातृभूमि की रक्षा ख़ातिर, जी जान जिसने लगा दिया।

घाँस की रोटी भी खाया, काँटों को शैय्या बना लिया॥

नमन उस शूरवीर को, जिसका, चेतक सा हमसाया था।

झाला सा संतरी जो अपनी , जान दे अभिमान बचाया था॥

नमन अकबर के मान-मर्दन वाले, उस वीर शिरोमणी को।

भारत भूमि पर शेर जन्मनेवाली, बारंबार नमन उस जननी को॥


✍🏻@raj_sri

हमारी परम्परा…नारी का सम्मान..!!!

नारियों से ही आज, नारियों से ही कल,

धर्म शास्त्र में भी, नारियों का गुणगान है।

घर बाहर इनकी है, इज़्ज़त उछलती,

नारियों का ‘रासि’, क्यूँ होता अपमान है॥

नारी ही है ये धरा, नारी है वसुन्धरा,

नारियों को पूजने की हमारी परम्परा।

नारी ही है जननी, नारी ही है संगिनी,

नारीयाँ हैं जीवन की अमृत निरर्झरा॥

सबर्ण हो दलित हो, चाहे गोरी काली,

भेदभाव छोड़ सब, नारी का सम्मान हो।

नारियों को पूजना है, पुरानी परम्परा तो,

देश में फिर इनका, खण्डित न मान हो॥


✍🏻@raj_sri


* निरर्झरा – अमर

बस माँ ही तो वो होती है..!!! 🤱🏻

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उम्र के आज हर उस मोड़ पे,
जो साथ तुम्हारा सब छोड़ दे;
इस हालात में सहारा जो होती है।
हाँ माँ, बस माँ ही तो वो होती है॥

जो सकूँ ना मिले शहर में गाँव में,
वो राहत उसके आँचल के छांव में;
हर आशा की आसरा जो होती है।
हाँ माँ, बस माँ ही तो वो होती है॥

या दुःख में रहूँ या रहूँ प्यार में,
जीवन के इस बीच मँझधार में;
हर तूफ़ाँ का किनारा जो होती है।
हाँ माँ, बस माँ ही तो वो होती है॥


✍🏻 @raj_sri


#मातृ_दिवस