मेरी माँ..!🤱🏻👵🏻

FeaturedMeri Maa

हँस हँस कर वो मेरी हर ग़लतियाँ सहती है;
मेरा बच्चा, सबसे अच्छा, मेरी माँ कहती है।

सुबह जगने से लेकर, रात के सोने तक वो;
रब से मेरी ख़ुशियों की, इल्तिजा करती है॥

कभी बाबा की डाँट से जो सहम जाता हूँ मैं;
अपनी आँचल में छुपा, मेरीढालबनती है।

कभी कभी जब हो जाती है वो बीमार तब;
इस हाल में भी पहले सा ख़याल रखती है॥

जीवन की परेशानियों में, अगर उलझ जाऊँ;
हर बार जैसी आज भी मेरी रहनुमा बनती है।

नहीं रहती है हरपल जुबां पर लेकिनरासि’;
मेरे तो दिल में ममतामयी, मेरी माँ रहती है॥


✍🏻raj_sri

तेरे नहीं होने से॰॰॰😒

वही सुबह वही शाम है, वही दिन और रात वही।
इक तेरे नहीं होने से अब, पहले वाली बात नहीं॥

तेरा साथ रहने से था, हर मौसम सावन सावन;
कितने सावन बीत गये, अब वैसी बरसात नहीं।

इक तेरे नहीं होने से अब॰॰॰

जब थी तू संग मेरे ये , दुनिया लगती थी अपनी;
अपनों संग रहकर भी, वो अपनों सा हालात नहीं।

इक तेरे नहीं होने से अब॰॰॰


@raj_sri

मेरी प्यारी बहना..!🏵

मेरी बहना, प्यारी बहना, तू मेरा अभिमान।
तेरे लिए सुन बहना मेरी, ये जीवन क़ुर्बान॥
तूझसे ही भरा भरा लागे, अपना ये घर-बार।
तुझ बिन सुना सुना लागे, कुटिया या दरबार॥
तुमसे ही महल सा लागे, टूटा फूटा मकान।
तेरे लिए तो बहना॰॰॰
तुझ बिन सुना, घर का कोना, वीरां ये संसार।
फीकी लागे सुरीला सावन, फूल जैसे अंगार॥
दुनिया के जंगल में तू, ख़ुशियों की उद्यान।
तेरे लिये तो बहना॰॰॰
कभी अवसादों में बहना तू, माँ सा लाड़ लड़ाये।
राह भटक जाने पर रासि, बाबा सा राह दिखाये॥
तेरा बहना रूप अनेकों, तू गुणों की खान।
तेरे लिये तो बहना॰॰॰

✍🏻@raj_sri

आप दोनो का होना… 👵🏻👨🏻‍🦳

आप दोनो का होना जैसे॰॰॰
तप्त धरा पर शीतल, बारिश की चंद बूँदों का होना।
संगदिल दुनिया में जैसे, इक दरियादिल का होना॥

आप दोनो का होना जैसे॰॰॰
बहारों में फूलों का और, फूलों में ख़ुश्बू का होना।
बागों को खून से सिंचने वाले, बाग़बान का होना॥

आप दोनो का होना जैसे॰॰॰
मेरे नाम, मेरे काम, मेरे अस्तित्व का ज़िन्दा होना।
अनजानी दुनिया में जैसे, अपनी दुनिया का होना॥

आप दोनो का होना जैसे॰॰॰
मेरे सारे सुप्त सपनों का जैसे, फिर अरुणोदय होना।
मेरे जीवन में हरपल ‘रासि’, बस मंगल ही मंगल होना॥


✍🏻@raj_sri

तुम कह कर तो देखते…

तुम कह कर तो देखते,

छोड़ देता तुझसे, यूँ नज़रों को मिलाना;
तुझे दिल में रखना, और मन में बसाना।
तेरी परेशानियों में मेरा, वो परेशान होना;
छोड़ देता ग़म में भी, मैं यूँ खिलखिलाना॥

तुम कह कर तो देखते…

तेरे पास आने का न,कोई ढूँढता बहाना,
छोड़ देता मैं तेरी गलियों में आना जाना।
यूँ तो महफ़िलों में न, ज़ाहिर कभी करता;
भूल जाता तन्हाई मे भी, यूँ आँसु बहाना॥

तुम कह कर तो देखते…



✍🏻 @raj_sri

ग़ज़ल..!

जाने से पहले बस मेरा एक काम कर दो।
उन सारे गुजरे लम्हों को मेरे नाम कर दो॥

तुम्हारा साथ पा कर जो बन गया था ख़ास;
मेरी उस शख़्सियत को अब आम कर दो॥

जन्म जन्मों तक साथ साथ जीने मरने को;
दिल में पल रहे ख़्वाब का अंजाम कर दो॥

पी लूँगा अब आब-ए-तल्ख़ को भी ‘रासि’;
बस ‘आब-ए-चश्म’ को तुम जाम कर दो॥

✍🏻@raj_sri

Be Nationalist, not Provincial..!😌🙏🏻

Last week, I got an SMS on my WhatsApp who was forwarded by one of my Mumbaikar Friend.

I don’t know, who is behind all this, but I m sure, this type of message is not good for health of our healthy India.

I also reply to him, and want to reply all those, who seeding the seeds of separations in this corona pandemic situation.

First, read, what I got on WhatsApp ⤵️

*Tomorrow, when the CORONA virus is finished*, then thousands and millions of people will run towards Mumbai,then this city will be their own city… Then they will come to Harness Mumbai.. Then Mumbai will become city of their dreams… Then this Mumbai will be their own Mumbai….😞

Today my Mumbai is injured, Today my Mumbai needs treatment…… Today my Mumbai is infected….. Today my Mumbai is disappointed….. But I am still in Mumbai…. I was in Mumbai yesterday, and I will be in Mumbai tomorrow too….. This is my Mumbai …. City of MY DREAMS which I have fulfilled here, I won’t let my city die, I will fight, I will struggle…..

We will win together but we will not let Mumbai die, Mumbai is not my workplace, Mumbai is my home….. Mumbai is not a business strong hold for me but Mumbai is a family…..

Mumbai beats in the heart of Mumbaikar……

This is what I will be…..

Because I am a Mumbaikar…..

I LOVE Mumbai ❤️

I was so disturbed that I decided to reply him and all those hate monger, who want to spread the hate among labours, their home state and their workplace state.

“I respect your feelings, but being a Mumbaikar, you should not defame the labour’s credibility.

They did not leave the city in fashion or fear of corona only. But when they failed to arrange the essential things for live himself and their family , decided to leave their holy workplace.

This is not a matter of Mumbai only, but of all major city of india. so please, please, please, kindly stay with this real hero- less paid labourers, whose hard work make our life happy.

In times of sorrow, we often take refuge in our mother’s lap, so all the labour returned their motherland, their Gaon.

Please don’t politicised this…!🙏🏻

Let’s pray for these karmveer for their safe and hassle free journey. And also for their happiest returning to their holy workplace (Either Mumbai, Delhi, Madras or Ranchi, Patna, Locknow).”

Once again, request you, Do not get entangled in casteism, linguism, regionalism. Nationalism is paramount. So, 👉🏻 Be Nationalist, not Provincial..!👈🏻

Jai Hind🇮🇳🙏🏻

कोरोना से बचाव..!

अल्प आत्मीयता, अल्प प्रवास का, मन में लें संकल्प।
महामारी से बचने का ‘रासि’, है एकमेव यही विकल्प॥

मानव हो कर मानवता का हम, दिल में रखें सद्भाव।
कोई प्रतिवासी, रहवासी को अखरे ना कोई अभाव॥

मिल बाँट ही खाना होगा अगर, नमक ही हो अनुकल्प।
कोरोना से बचने का ‘रासि’, बस एकमेव यही विकल्प॥

अकारण ही बाज़ारों में दिन-रात, यूँ फेरे ना लगायें।
उतावलेपन में अपने घर को हम, भण्डारे ना बनायें॥

अवचेतना में भी चेतना से समझें, संयम ही अविकल्प।
कोरोना से बचने का ‘रासि’, बस एकमेव यही विकल्प॥


✍🏻@raj_sri


*अनुकल्पबदले में
*अविकल्पएक मात्र विकल्प

कोरोना काल..!

तड़प तड़प कर जीने का जब ख़ौफ़ भरा हो मन में।
मौत, तेरा तब, डर नहीं, अब दर्द भरे इस जीवन में॥

ये आहट प्रलय का है जिसका, ज़िक्र है पुराणों में।
या क़यामत की तारीख़ जिसकी चर्चा है कुरानों में॥

अक्षय हमारी आत्मा है रासि, माया क्यूँ इस तन में।
मौत, तेरा तब, डर नहीं अब, दर्द भरे इस जीवन में॥


✍🏻@raj_sri


PicCourtesy:- GoogleImages

एटा_हत्याकाण्ड😢

क्या उसका हाथ तनिक भी सच नहीं कांपा होगा।‬
उन मासूमों के नर्म – नाज़ुक गर्दन को चांपा होगा॥‬

‪किस ख़ता की सज़ा दिया उन बुलबुल मैनों को।
मरहूम कर दिया सपनों से उन दो दो नन्हे नैनों को॥

‪अपने अंश के दर्द को उसका रूह नहीं भांपा होगा?‬
उन मासूमों के नर्म – नाज़ुक गर्दन को चांपा होगा॥‬

क्या उसकी मजबूरी होगी, ये रब जाने या जाने वो।
वरना कलेजे के कतरे को क्यूँ छोड़ती मर जाने को॥

सबकी ज़िंदगी को मौत से महँगा उसने मांपा होगा।
उन मासूमों के नर्म – नाज़ुक गर्दन को चांपा होगा॥‬


✍🏻@raj_sri


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